ठाणे में शिवसेना (UBT) नेता की दफ्तर में हत्या, एक गिरफ्तार, नौ टीमें तलाश में
नकाबपोश हमलावरों ने दफ्तर में घुसकर हमला किया; अस्पताल ले जाते समय नेता की मौत हो गई।
मुख्य बातें
- शिवसेना (UBT) विभाग प्रमुख प्रदीप पुरनेकर पर दफ्तर में गोली और चाकू से हमला।
- पांच लोगों पर BNS और आर्म्स एक्ट में केस, एक गिरफ्तार और एक हिरासत में।
- परिवार ने राजनीतिक रंजिश का आरोप लगाया, पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है।
रात 9:30 बजे दफ्तर में हमला
महाराष्ट्र के ठाणे शहर में शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के विभाग प्रमुख प्रदीप पुरनेकर की मंगलवार रात हत्या कर दी गई। पुलिस के अनुसार घोड़बंदर रोड के पास कापुरबावड़ी पुलिस थाना क्षेत्र में करीब 9:30 बजे नकाबपोश हमलावर उनके दफ्तर में घुसे, गोली चलाई और धारदार हथियारों से हमला किया।
उन्हें तुरंत पास के एक निजी अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। इस घटना से इलाके में तनाव फैल गया।
कौन-कौन आरोपी
PTI की रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस ने पांच लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और आर्म्स एक्ट की धाराओं में केस दर्ज किया है। इनमें हत्या (धारा 103(1)), साझा इरादे से किया गया अपराध और आपराधिक साजिश की धाराएं शामिल हैं।
FIR में नामजद लोगों में पुरनेकर का एक पूर्व सहयोगी भी बताया गया है। पुलिस ने एक संदिग्ध हमलावर को गिरफ्तार किया है और एक अन्य को हिरासत में लिया है, लेकिन संवेदनशील हालात का हवाला देकर उनके नाम सार्वजनिक नहीं किए। बाकी आरोपियों को पकड़ने के लिए नौ विशेष टीमें बनाई गई हैं।
परिवार का आरोप और विरोध प्रदर्शन
मृतक के परिवार ने हत्या के पीछे राजनीतिक रंजिश का आरोप लगाया है। बुधवार दोपहर सैकड़ों पार्टी कार्यकर्ता, परिवार के सदस्य और वरिष्ठ नेता विरोध में जुटे। पुलिस का कहना है कि परिवार के साजिश संबंधी हर आरोप की जांच की जा रही है।
फिलहाल पुलिस ने हत्या का मकसद आधिकारिक तौर पर तय नहीं किया है। व्यक्तिगत विवाद, पुरानी रंजिश और राजनीतिक कोण, सभी पहलुओं की पड़ताल चल रही है।
शहर की सुरक्षा पर उठे सवाल
भीड़भाड़ वाले इलाके में दफ्तर के अंदर घुसकर हथियारों से हमला होना शहर की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। ऐसी घटनाएं आम लोगों में भी डर पैदा करती हैं। पुलिस ने इलाके में गश्त बढ़ाई है और लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है।
अगर किसी के पास घटना से जुड़ी कोई जानकारी या वीडियो है, तो वह सीधे पुलिस को दे सकता है। सोशल मीडिया पर बिना पुष्टि वाले दावे शेयर करने से जांच प्रभावित हो सकती है।
आगे क्या होगा
फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद ही साजिश की पूरी तस्वीर साफ होगी। सभी आरोपी कानून की नजर में तब तक निर्दोष माने जाते हैं, जब तक अदालत में दोष साबित न हो।
स्रोत और आगे पढ़ें
यह लेख ऊपर दिए गए स्रोतों की जानकारी के आधार पर EngBen ने अपने शब्दों में तैयार किया है। आरोपित व्यक्ति अदालत में दोष साबित होने तक निर्दोष माने जाते हैं। कीमतें एक्स-शोरूम हैं और बदल सकती हैं।