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रबी MSP का ऐलान: गेहूं पर सिर्फ 25 रुपये बढ़े, सरसों-मसूर वालों को बड़ा फायदा

सरकार का इशारा साफ है: दलहन और तिलहन की ओर बढ़िए, क्योंकि सबसे बड़ी बढ़ोतरी वहीं मिली है।

EngBen संपादकीय टीम ·
प्रतीकात्मक चित्र (AI से बनाया गया)। यह किसी वास्तविक घटना, व्यक्ति या वाहन की तस्वीर नहीं है।

मुख्य बातें

  • गेहूं MSP 25 रुपये बढ़कर 2,610 रुपये प्रति क्विंटल।
  • कुसुम में सबसे ज्यादा 675 रुपये की बढ़ोतरी, नया MSP 7,215 रुपये।
  • सरसों 6,613, मसूर 7,390, जौ 2,286 और चना 5,958 रुपये प्रति क्विंटल।

बुवाई से ठीक पहले नई कीमतें

रबी बुवाई शुरू होने से ठीक पहले केंद्र सरकार ने बुधवार को विपणन सत्र 2027-28 के लिए सभी छह रबी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में बढ़ोतरी को मंजूरी दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (CCEA) ने यह फैसला लिया।

सरकार का कहना है कि बढ़े हुए MSP से किसानों को लाभकारी दाम मिलेंगे और फसल विविधीकरण, खासकर दलहन व तिलहन की ओर झुकाव बढ़ेगा।

किस फसल का क्या भाव

गेहूं का MSP 25 रुपये बढ़कर 2,585 से 2,610 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है, जो एक प्रतिशत से भी कम बढ़ोतरी है। कुसुम (सैफ्लावर) को सबसे ज्यादा 675 रुपये की बढ़ोतरी मिली और इसका MSP 7,215 रुपये हो गया।

सरसों-रेपसीड 413 रुपये बढ़कर 6,613 रुपये, मसूर 390 रुपये बढ़कर 7,390 रुपये, जौ 136 रुपये बढ़कर 2,286 रुपये और चना 83 रुपये बढ़कर 5,958 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है।

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लागत पर कितना मुनाफा

हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार नई दरों में गेहूं पर अखिल भारतीय औसत उत्पादन लागत के मुकाबले 106% का मार्जिन है। सरसों पर 96%, मसूर पर 92%, चना पर 59%, जौ पर 58% और कुसुम पर 50% मार्जिन बताया गया है। सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि गेहूं की उत्पादन लागत 1,264 रुपये प्रति क्विंटल है।

सरकार ने खरीद के लिए 90,962 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है, जिसके तहत 324 लाख टन खरीद का अनुमान है।

गेहूं किसानों की चिंता न करें नजरअंदाज

गेहूं उगाने वाले किसानों के लिए 25 रुपये की बढ़ोतरी मामूली मानी जा रही है, खासकर तब जब खाद, डीजल और मजदूरी का खर्च बढ़ रहा है। दूसरी ओर, कम पानी में होने वाली सरसों, चना और मसूर पर बेहतर भाव किसानों के लिए विकल्प खोलते हैं, खासकर उन इलाकों में जहां इस बार बारिश कम हुई।

फसल चुनने से पहले अपने इलाके की पानी की उपलब्धता, मंडी की दूरी और सरकारी खरीद केंद्रों की स्थिति जरूर देखें। MSP का फायदा तभी मिलता है जब खरीद केंद्र तक फसल पहुंचे और पंजीकरण समय पर हो।

किसान अब क्या करें

अपने राज्य के खरीद पोर्टल पर पंजीकरण की तारीखों पर नजर रखें और कृषि विभाग की बीज व बुवाई सलाह का पालन करें। सही समय पर तैयारी से बेहतर दाम मिलने की संभावना बढ़ती है।

स्रोत और आगे पढ़ें

यह लेख ऊपर दिए गए स्रोतों की जानकारी के आधार पर EngBen ने अपने शब्दों में तैयार किया है। आरोपित व्यक्ति अदालत में दोष साबित होने तक निर्दोष माने जाते हैं। कीमतें एक्स-शोरूम हैं और बदल सकती हैं।

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